
हमारे जीवन की समझ
जीवन क्या है?
जीवन यात्रा से अधिक गीत और नृत्य जैसा है। इसका कोई एक तय “गंतव्य” नहीं है।
कल्पना कीजिए कि आपके पास भोजन, कपड़े और आभूषण सब हैं, पर संसार में दूसरा कोई व्यक्ति नहीं है। जीवन कितना खाली लगेगा। तब किसी शानदार वस्तु या आपकी सबसे आकर्षक सेल्फ़ी का क्या उपयोग होगा?
जैसे आपका शरीर “आप” का भाग है पर स्वयं पूरा “आप” नहीं, वैसे ही आप भी किसी बड़े संपूर्ण का भाग हैं।
शरीर का अकेला अंग बहुत कम कर सकता है। उसी तरह अकेला व्यक्ति भी सीमित है। जिस समाज में आप रहते हैं उससे आपको बहुत कुछ मिलता है; इसलिए उसके प्रति आपका दायित्व और जिम्मेदारी भी है।
जीवन कैसे जिएँ?
अच्छे बनें और अपना सर्वोत्तम दें। स्वार्थी नहीं, निःस्वार्थ बनें। याद रखें कि आप ब्रह्मांड का केन्द्र नहीं हैं।
दूसरों के अच्छे कामों में सहायता करें और स्वयं जीवन की सहायता करें। स्वतंत्र जिएँ, सीखना सीखें और सीखते रहें।
समझ आने पर भय छोड़ें। अपना गीत चुनें और उस पर अपना सर्वोत्तम नृत्य करें।



